जावद क्षेत्र के छात्रों के जाति प्रमाण पत्र में पेंच, भविष्य दांव पर – पटवारी-तहसीलदार से OK फिर भी SDM ऑफिस में अटके आवेदन।
*पालकों ने बच्चों के भविष्य को देखते हुए सरलीकरण की मांग की, बोले – स्कॉलरशिप और एडमिशन का समय निकला जा रहा है*
सिंगोली। जावद विधानसभा क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राओं और उनके पालकों के लिए इन दिनों एक छोटा सा सरकारी कागज बड़ी मुसीबत बन गया है। यह कागज है – डिजिटल जाति प्रमाण पत्र।
क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों – सिंगोली, जावद, रतनगढ़, अठाना और आसपास के गांवों के सैकड़ों पालक पिछले एक महीने से तहसील और लोक सेवा केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रमाण पत्र समय पर नहीं बन पा रहे हैं।
*निचले स्तर से पूरी फाइल फिर भी अटकी*
पालकों का कहना है कि उन्होंने ग्राम पंचायत सचिव, हल्का पटवारी और सिंगोली तहसीलदार कार्यालय से जुड़ी सभी जमीनी जांच और फील्ड वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। पटवारी द्वारा मौके पर जाकर रिपोर्ट लगाई गई है और तहसीलदार ने भी अनुशंसा कर फाइल को आगे अनुविभागीय अधिकारी (SDM) जावद कार्यालय भेज दी है।
लेकिन बताया जा रहा है कि SDM स्तर पर दस्तावेजों के सूक्ष्म और तकनीकी परीक्षण के दौरान 1984 के पुराने नियमों का हवाला देते हुए कई आवेदनों को निरस्त किया जा रहा है। कई मामलों में 50-60 साल पुराने रिकॉर्ड, खतौनी या पुराने जाति प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं, जो ग्रामीण गरीब परिवारों के पास उपलब्ध नहीं हैं।
*बच्चों का साल खराब होने का डर*
इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। वर्तमान में शासकीय स्कूलों, कॉलेजों में एडमिशन और SC/ST/OBC छात्रवृत्ति, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप, मुख्यमंत्री मेधावी योजना और विदेश अध्ययन जैसी योजनाओं के फॉर्म भरने की अंतिम तिथि नजदीक है। जाति प्रमाण पत्र के अभाव में सैकड़ों छात्र आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
एक पालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया – _”हमने सारी जांच करवा ली, पटवारी साहब ने घर आकर देख लिया, लेकिन ऊपर से फाइल रिजेक्ट हो जाती है। साहब, बच्ची का कॉलेज में एडमिशन अटका है, स्कॉलरशिप चली जाएगी तो फीस कहां से भरेंगे?”_
*प्रशासन से मानवीय अपील*
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और पालकों ने जिला प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश शासन की मंशा लोक सेवा गारंटी के तहत लोगों को समय पर सेवा देना है। यदि पटवारी की सकारात्मक फील्ड रिपोर्ट और सिंगोली तहसीलदार की अनुशंसा मौजूद है, तो कुछ तकनीकी कमियों में शिथिलता देकर बच्चों के हित में प्रमाण पत्र जारी किए जाएं। खारिज हुए आवेदनों की एक बार फिर से व्यावहारिक समीक्षा की जाए ताकि किसी भी पात्र बच्चे का साल बर्बाद न हो।
*इनका कहना है:*
इस संबंध में जावद SDM कार्यालय का कहना है कि _”जाति प्रमाण पत्र 1984 के अधिनियम और नियमानुसार ही जारी किए जा सकते हैं। कई आवेदनों में दस्तावेज अपूर्ण हैं। इसके लिए आवेदकों को दस्तावेज पूर्ति हेतु सिंगोली और जावद लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से सूचना भी भिजवा दी गई है। नियमानुसार पात्र पाए जाने पर सभी को प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे।”_
क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को देखते हुए इस मामले में सकारात्मक पहल करेगा।
